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5 Comments

  1. Amit Wadhwani
    September 21, 2018 @ 7:10 pm

    बहुत ही उम्दा लेख लिखा है राजीव जी, लेखन क्षेत्र में पर्दापण करने वालों के लिए बहुत ही प्रयोज्य तथा सार्थक लेख, हार्दिक शुभकामनाएं इस लेख के लिए, समय निकाल कर आपके अन्य लेख भी जरूर पढूंगा?

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  2. Vickky
    September 22, 2018 @ 9:19 am

    बहुत बढ़िया
    ये सब चीजे कितना मायने रखता एक उपन्यास में ये बताया आपने मुझे भी पढ़ते समय यही लगता को आखिर मिस्ट्री बनती कैसे लेखक घटना को किस तरह से राहस्यात्मक पुट देता

    बढ़िया लिखा आपने???

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  3. आनंद कुमार सिंह
    September 22, 2018 @ 9:59 am

    बहुत शानदार लेख। मिस्ट्री- क्राइम के नवोदित लेखकों के लिए यह एक गाइड का काम कर सकती है।

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  4. विकास नैनवाल
    September 22, 2018 @ 10:14 am

    बेहतरीन लेख। अपराध कथा लेखन के हर पहलू को आपने छू लिया है। उम्मीद है नए लेखकों को इससे काफी कुछ सीखेंगे। आभार।

    फिलहाल फॉन्ट का साइज काफी छोटा है। इसे बढ़ा दें तो बेहतर रहेगा। सफ़ेद बैकग्रॉउंड पर ग्रे टेक्स्ट कम उभर कर आ रहा है। टेक्स्ट का रंग थोड़ा गहरा स्याह हो तो टेक्स्ट उभर कर आएगा और पढ़ने में शायद लोगों को आसानी होग।

    आगे भी ऐसे लेखों का इन्तजार रहेगा।
    duibaat.blogspot.com

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  5. सुनीत शर्मा
    September 22, 2018 @ 8:21 pm

    बहुत ही ज्ञानपरक लेख राजीव भाई। ऐसे ही और ज्ञानवर्धक लेखों का इंतजार रहेगा।

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