किस्से क्राइम क्लब के

किस्से क्राइम क्लब के एक ई-मैगज़ीन है जो पूर्णतः काल्पनिक अपराध कथाओं (फिक्शनल क्राइम फ़िक्शन स्टोरीज) पर आधारित है। विदेशों में जब काल्पनिक अपराध कथाओं का जन्म हुआ था तो उनको मैगज़ीन के फॉरमेट में ढालकर पाठकों तक पहुंचाया गया था जिसे पल्प मैगज़ीन के रूप में जाना जाता था। लघु कथा, कहानी, उपन्यास, लघु-उपन्यास आदि सभी इसी पत्रिका के फॉरमेट में छपती थी और जन जन तक पहुंचती थी। इन हरैतंगेज, सस्पेंस, थ्रिल एवं एडवेंचर से भरपूर कहानियों को कई पाठक मिले और विदेशों में पल्प मैगजीन्स की भरमार हो गई। भारत में भी अपराध कथाओं को आरम्भ में पत्रिकाओं में ही छापा जाता था। गोपालराम गहमरी जी वह प्रथम लेखक थे हिंदी भाषा में जिन्होंने इन अपराध कथाओं को जासूस नामक पत्रिका में छापा और जन-जन तक पहुंचाया। वे भारत में अपराध कथाओं के जनक के रूप में जाने जाते हैं। अपराध कथाओं, बाद के समय के लेखकों में एक मकबूल एवं प्रतिष्ठित लेखक इब्न-ए-सफी भी जासूसी दुनिया नामक पत्रिका में अपनी कहानियों को पब्लिश किया करते थे। आगे के कई मकबूल लेखक जैसे कि ओम प्रकाश शर्मा जी, वेद प्रकाश कंबोज जी, सुरेंद्र मोहन पाठक जी, अकरम इलाहाबादी जी एवं चंदर आदि ने अपने शुरुआती दिनों में पत्रिकाओं के लिए ही अपनी कहानियां लिखीं और इनकी लिखी कहानियां एक्सक्लुसिवली पत्रिकाओं के लिए ही लिखी जाती थी – जैसे – तारा, नीलम जासूस, जासूस नंबर 1 आदि।बाद के दिनों में जब पत्रिकाएं बंद हुई तो लुगदी पेपर पर यही लेखक अपने उपन्यास लेकर आने लगे।

उसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए, नए लेखकों को क्राइम फिक्शन लेखन में बढ़ावा देने के लिए इस मैगज़ीन की नींव रखी गयी। इस मैगज़ीन के लिये हम प्रति माह उन लेखकों से कहानियां मांगते हैं जिनमें लिखने की काबिलियत तो है लेकिन प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं। आप अपनी कहानियां यहां भेजें, ताकि आपकी कहानियां सैंकड़ों पाठक पढ सकें एवं अपनी पाठकीय कसौटी पर आपको तौल सकें।

         यह योजना अभी तक किसी भी प्रकार के आर्थिक लाभ से दूर है। भविष्य में होने वाले किसी भी आर्थिक लाभ को वेबसाइट एवं मैगज़ीन के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयोग किया जाएगा

किस्से क्राइम क्लब के
जुलाई 2019 अंक 

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