द थर्ड डिग्री

“तू झूठ बोलता है, साले!” – सब इंस्पेक्टर दिनेश राठी के होठों से निकलता यह शब्द गौरव प्रधान के लिए किसी रिवाल्वर से निकली गोली के समान था।

“तूने ही अपने पिता का क़त्ल किया है। बता क्यूँ किया अपने बाप का खून, किसलिये किया, कैसे किया, बता।” – दिनेश राठी फिर चिल्लाया। उसकी आँखें गुस्से में लाल हो, गौरव प्रधान को देख रही थीं।

दिनेश राठी उस वक़्त, महरौली थाने में, पुलिस लॉक-अप में मौजूद था। इसे पुलिस लॉक-अप के स्थान पर एक अँधेरी कोठरी कहेंगे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उस कोठरी में, १८ वाट का एक सी.एफ.एल., सीलिंग से आती हुई एक होल्डर के साथ लटका हुआ, जल रहा था लेकिन उसकी रोशनी इतनी काफी नहीं थी कि वह पूरी कोठरी में पर्याप्त प्रकाश कर सके। उस कोठरी का दरवाजा अन्दर से बंद था और ऐसा लग रहा था कि उस कोठरी के बाहर मौत का बसेरा हो, क्यूंकि जैसे ही कोठरी के अन्दर सन्नाटा पसरता, बाहर से किसी की चूं करने की आवाज भी नहीं हो रही थी। More