फॉरेंसिक साइंस : द कलर्स ऑफ़ मर्डर #१

सर सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के द्वारा लिखे गए लगभग सभी उपन्यास, क्राइम-फिक्शन श्रेणी के अन्दर आते हैं। चूंकि वो क्राइम-फिक्शन लिखते हैं तो उसमे क्राइम होना तो आम बात है। जब क्राइम हो कहानी में तो खून के धब्बे और उसकी धार दिखना भी साधारण सी बात है। कई बार ऐसा होता है कि मौकायेवारदात पर कुछ खून के धब्बे नज़र आते हैं जो लाश से अलग होते हैं। ऐसे में उस खून के धब्बे की जांच पुलिस जैसी इन्वेस्टीगेशन एजेंसी के लिए बहुत मुश्किल काम बन जाती है। मौकायेवारदात से उठाये गए सभी प्रकार के सूत्रों को फॉरेंसिक टीम अपने लैब में लेकर जाती है जहाँ उस पर से फिंगर-प्रिंट और दुसरे सूत्रों की तालाश की जाती है।

अगर ऐसे किसी मौकायेवारदात पर कोई लाल धब्बा नज़र आये तो क्या उसे खून ही मान लेना चाहिए। गौर करने वाली बात यह है, कि सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के उपन्यास, “धोखा” More